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शुक्रवार, 26 फ़रवरी 2010

कोई क्या है, पता चलता है......

कोई क्या है, पता चलता है कुछ भी ?
किसी की शक्ल पे लिक्खा है कुछ भी?

गवाही कौन देगा अब बताओ?
किसी ने भी नहीं देखा है कुछ भी.

अगर ताक़त है तो कुछ भी उठा लो
कि मांगे से नहीं मिलता है कुछ भी.

खयालों के उफक पे खामुशी है
न उगता है न अब ढलता है कुछ भी.

सरो-सामां बहुत है घर में लेकिन
सलीके से नहीं रक्खा है कुछ भी.
----देवेंद्र गौतम 

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कुछ तो कहिये कि लोग कहते हैं
आज ग़ालिब गज़लसरा न हुआ.
---ग़ालिब

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