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मंगलवार, 25 जनवरी 2011

रोजो-शब का अज़ाब....

रोजो-शब का अज़ाब देखेंगे.
नींद आई तो ख्वाब देखेंगे.


तीरगी के हिजाब में रहकर
रौशनी बेहिजाब देखेंगे.


सामने भी हुए तो क्या हासिल
दरमियां  हम हिजाब देखेंगे.


जिंदगी की तवील राहों में
रंजिशें बेहिसाब देखेंगे.


आइना गुफ्तगू पे उतरेगा
आप अपना जवाब देखेंगे.


हर वरक पर उगेंगे अक्स तेरे
जब भी कोई किताब देखेंगे.


मैकशी लाख हो बुरी लेकिन
आज पीकर शराब देखेंगे.


ख्वाहिशों के चमन में हम गौतम
रोज़ ताज़ा गुलाब देखेंगे


----देवेंद्र गौतम .

1 टिप्पणियाँ:

इस्मत ज़ैदी ने कहा…

रोजो-शब का अज़ाब देखेंगे.
नींद आई तो ख्वाब देखेंगे.
बहुत ख़ूब !


हर वरक पर उगेंगे अक्स तेरे
जब भी कोई किताब देखेंगे.

ख्वाहिशों के चमन में हम गौतम
रोज़ ताज़ा गुलाब देखेंगे

वाह !

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कुछ तो कहिये कि लोग कहते हैं
आज ग़ालिब गज़लसरा न हुआ.
---ग़ालिब

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