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रविवार, 22 सितंबर 2013

पत्ते टूटे डाली से.

मौसम की बदहाली से.
पत्ते टूटे डाली से.

टप-टप आंखों से टपके
कुछ आंसू घड़ियाली से.

क्यों डरते हैं सात फलक
धरती की हरियाली से.

तुम भी फुर्सत में बैठे
हम भी खाली-खाली से.

दौलत जिसके पास वही
डरते हैं कंगाली से.

हर पौधा नाराज अभी
अपने बाग के माली से.

--देवेंद्र गौतम



3 टिप्‍पणियां:

  1. मौसम की बदहाली से.
    पत्ते टूटे डाली से.

    kya bat hai.waaaah umda ....bhetrin matla ha.......shubhkamnaye

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  2. प्रिय ब्लागर
    आपको जानकर अति हर्ष होगा कि एक नये ब्लाग संकलक / रीडर का शुभारंभ किया गया है और उसमें आपका ब्लाग भी शामिल किया गया है । कृपया एक बार जांच लें कि आपका ब्लाग सही श्रेणी में है अथवा नही और यदि आपके एक से ज्यादा ब्लाग हैं तो अन्य ब्लाग्स के बारे में वेबसाइट पर जाकर सूचना दे सकते हैं

    welcome to Hindi blog reader

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कुछ तो कहिये कि लोग कहते हैं
आज ग़ालिब गज़लसरा न हुआ.
---ग़ालिब

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