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गुरुवार, 9 जून 2011

क्या ढोते बेकार के रिश्ते.

("OBO लाइव महा उत्सव" अंक ८...में प्रस्तुत)

तोड़ दिए संसार के रिश्ते. 
क्या ढोते बेकार के रिश्ते.

स्वर्ग-नर्क के बीच मिलेंगे 
इस पापी संसार के रिश्ते.

रोज तराजू में तुलते हैं
बस्ती और बाज़ार के रिश्ते.




खून के रिश्तों से भी ज्यादा
गहरे हैं व्यवहार के रिश्ते.

धीरे-धीरे टूट रहे हैं
आंगन से दीवार के रिश्ते.

टूट गए अबके आंधी में 
कश्ती और पतवार के रिश्ते.

सबकी आंखों में खटकेंगे 
हम दोनों के प्यार के रिश्ते.

किस खूबी से निभा रहे हैं
हम तलवार की धार के रिश्ते.

दो मुल्कों में ठनी  है लेकिन
कायम हैं व्यापार  के रिश्ते. 

---देवेंद्र गौतम

16 टिप्पणियाँ:

Navin C. Chaturvedi ने कहा…

'कायम हैं व्यापार के रिश्ते"

...............ये कही मार्के वाली बात|

दिगम्बर नासवा ने कहा…

गौतम जी ... सलाम है आपकी लेखनी को ... किसी एक शेर को आज कोट नही करूँगा ....
सभी एक दूसरे को पीछे छोड़ रहे हैं .... छा गये आज तो ...

Kunwar Kusumesh ने कहा…

मौला तू कायम रहने दे
मेरे-बरखुरदार के रिश्ते.

Suman ने कहा…

nice

ana ने कहा…

wah...ati sundar

Udan Tashtari ने कहा…

बहुत बेहतरीन गज़ल...पूरी की पूरी!!!

Minakshi Pant ने कहा…

ये अपने विचारों का द्वन्द है ,
जीने दो उसको जो स्वछन्द है |
निराधार है सारी बातें ,
जिसमें कोई सार नहीं |
नाम के हैं सारे रिश्ते ,
जिसमें प्यार नहीं , सत्कार नहीं |
aapki rachna hame bahut hi khubsurat lagi dost :)

राकेश कौशिक ने कहा…

पढने को सौगात मिली है
आज मुझे ईमेल के रश्ते

नायाब शेरों से सजी लाजवाब ग़ज़ल - बधाई

Sunita Sharma ने कहा…

बहूत अच्छा लिखा है आज के दौर में रिशतों की यही परिभाषा है।

इस्मत ज़ैदी ने कहा…

खून के रिश्तों से भी ज्यादा
गहरे हैं व्यवहार के रिश्ते.

धीरे-धीरे टूट रहे हैं
आंगन से दीवार के रिश्ते.

पूरी ग़ज़ल ही बेहद ख़ूबसूरत है लेकिन इन अश’आर की तारीफ़ के लिये अल्फ़ाज़ ढूंढ रही हूं
बहुत उम्दा !!!!!!!

वीना ने कहा…

बहुत बढ़िया..पूरी ग़ज़ल...हर शेर लाजवाब...

Amrita Tanmay ने कहा…

Rishton ki gahri paribhasha ki vyakhya shabdon se gahra rishta banati gajal...lajabav...

हरकीरत ' हीर' ने कहा…

सबकी आंखों में खटकेंगे
हम दोनों के प्यार के रिश्ते.

बधाई ....
ये pyaar bnaa rahe ......
:))

Rajendra Swarnkar : राजेन्द्र स्वर्णकार ने कहा…

:))

सबकी आंखों में खटकेंगे
हम दोनों के प्यार के रिश्ते.


बधाई हमारी ओर से भी ....
ये pyaar bnaa rahe ......
:))


निर्मला कपिला ने कहा…

रोज़ तराजू मी----
और धीरे धीरे टूट रहे हैं----
नहुत खूबसूरत शेर हैं सुन्दर गज़ल के लिये बधाई।

रंजना ने कहा…

खून के रिश्तों से भी ज्यादा
गहरे हैं व्यवहार के रिश्ते.

वाह...वाह...वाह... क्या बात कही...
सभी के सभी शेर मन मोहने वाले...
बहुत ही सुन्दर ग़ज़ल...

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कुछ तो कहिये कि लोग कहते हैं
आज ग़ालिब गज़लसरा न हुआ.
---ग़ालिब

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