समर्थक

गुरुवार, 29 मार्च 2012

खता क्या है मेरी इतना बता दे


खता क्या है मेरी इतना बता दे.
फिर इसके बाद जो चाहे सजा दे.

अगर जिन्दा हूं तो जीने दे मुझको
अगर मुर्दा हूं तो कांधा लगा दे.

हरेक जानिब है चट्टानों का घेरा
निकलने का कोई तो रास्ता दे.


न शोहरत चाहिए मुझको न दौलत
मेरा हासिल है क्या मुझको बता दे.

अब अपने दिल के दरवाज़े लगाकर
हमारे नाम की तख्ती हटा दे.

जरा आगे निकल आने दे मुझको 
मेरी रफ़्तार थोड़ी सी बढ़ा दे.

ठिकाना चाहिए हमको भी गौतम
ज़मीं गर वो नहीं देता, खला दे. 

---देवेंद्र गौतम 


11 टिप्पणियाँ:

हरकीरत ' हीर' ने कहा…

न शोहरत चाहिए मुझको न दौलत
तू मेरा नाम मिट्टी में मिला दे.

लो जी मिटटी में क्यों ....?
''तू मेरा नाम आँखों में बसा ले '' क्यों नहीं ?

expression ने कहा…

बहुत खूब..........
वैसे हीर जी की सलाह काबिले गौर है...

सादर
अनु

Devendra Gautam ने कहा…

बहन हरकीरत जी! आपकी सलाह सर आखों पर. लेकिन चूंकि रदीफ़ दे है इसलिए ले का प्रयोग नहीं हो सकता. इसके लिए अलग से ग़ज़ल कहनी पड़ेगी. आपकी आपत्ति दरअसल नाम मिट्टी में मिला देने की गुज़ारिश से है तो इस मिसरे को बदल देता हूं.

न शोहरत चाहिए मुझको न दौलत
मेरा हासिल है है क्या मुझको बता दे.

दीपिका रानी ने कहा…

हरेक जानिब है चट्टानों का घेरा
निकलने का कोई तो रास्ता दे.. ज़िंदगी में ऐसे भी मोड़ आते हैं कभी-कभी। अच्छी ग़ज़ल

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

न शोहरत चाहिए मुझको न दौलत
मेरा हासिल है क्या मुझको बता दे.

अब अपने दिल के दरवाज़े लगाकर
हमारे नाम की तख्ती हटा दे.


बहुत खूबसूरत गजल

vandana ने कहा…

अगर जिन्दा हूं तो जीने दे मुझको
अगर मुर्दा हूं तो कांधा लगा दे.

बहुत अच्छी गज़ल

सदा ने कहा…

वाह ..बहुत खूब ।

Udan Tashtari ने कहा…

बहुत उम्दा गज़ल!

Dr (Miss) Sharad Singh ने कहा…

बेहद खूबसूरत गज़ल ...

दिगम्बर नासवा ने कहा…

जबरदस्त शेर हैं सभी ... सुभान अल्ला ...

बेनामी ने कहा…

इसके अपने ब्लॉग को समझने की खुशी. उपरोक्त लेख बहुत असाधारण है, और मैं वास्तव में अपने ब्लॉग और कहते हैं कि तुम व्यक्त पढ़ने का आनंद लिया. मैं वास्तव में वापस एक विशिष्ट आधार पर दिखाई देते हैं, एक विषय के भीतर बहुत अधिक पोस्ट की तरह. बाँटने के लिए धन्यवाद ... लिखते रहते हैं!!

एक टिप्पणी भेजें

कुछ तो कहिये कि लोग कहते हैं
आज ग़ालिब गज़लसरा न हुआ.
---ग़ालिब

अच्छी-बुरी जो भी हो...प्रतिक्रिया अवश्य दें