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मंगलवार, 12 जून 2012

एक कत्ता


कुछ भी दामन में कम नहीं रहता.
मैं कभी चश्मे-नम नहीं रहता.
एक पल को ख़ुशी मिली होती
फिर मुझे कोई गम नहीं रहता.

----देवेंद्र गौतम 

8 टिप्पणियाँ:

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

वाह ॥बहुत खूब

नीरज गोस्वामी ने कहा…

बेजोड़ देवेन्द्र भाई...दाद कबूल करें

नीरज i

expression ने कहा…

वाह!!!!

बहुत बढ़िया................

अनु

Udan Tashtari ने कहा…

बहुत खूब

इस्मत ज़ैदी ने कहा…

bahut khoob !

दिलबाग विर्क ने कहा…

आपकी पोस्ट कल 14/6/2012 के चर्चा मंच पर प्रस्तुत की गई है
कृपया पधारें
चर्चा - 902 :चर्चाकार-दिलबाग विर्क

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

बहुत सार्थक प्रस्तुति!
अच्छा क़ता है!

निर्मला कपिला ने कहा…

लाजवाब्!

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कुछ तो कहिये कि लोग कहते हैं
आज ग़ालिब गज़लसरा न हुआ.
---ग़ालिब

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