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बुधवार, 29 अगस्त 2012

कोयले की खान में दबकर रहा हीरा बहुत.


हर किसी की आंख में फिर क्यों नहीं चुभता बहुत.
कोयले की खान में दबकर रहा हीरा बहुत.

इसलिए मैं धीरे-धीरे सीढियां चढ़ता रहा
पंख कट जाते यहां पर मैं अगर उड़ता बहुत.

ज़िन्दगी इकबार भटकी तो भटकती ही गयी
सबने समझाया बहुत समझा मगर थोडा बहुत.

रात भर बिस्तर पे कोई करवटें लेता रहा
रातभर रोता रहा बिल्ली का एक बच्चा बहुत.

कुछ बताओ तो सही ये रोग कब मुझको लगा
मैं किसी की याद में कबतक रहा खोया बहुत.

वो किसी मजबूत कंधे की सवारी कर रहा है
वरना उसका इस कदर जमता नहीं सिक्का बहुत.

फिर अचानक धूप की किरनें ज़मीं पर आ गयीं
फिर अचानक चांद का चेहरा हुआ फीका बहुत.

हम तवज़्ज़ो दें न दें क्या फर्क पड़ता है उसे
उसकी फितरत है कि वो सुनता है कम, कहता बहुत.

---देवेंद्र गौतम

13 टिप्‍पणियां:

  1. ज़िन्दगी इकबार भटकी तो भटकती ही गयी
    सबने समझाया बहुत समझा मगर थोडा बहुत.

    Aisahee hota hai!

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  2. बहुत ही अच्छी ग़ज़ल हमेशा की तरह...बधाई

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  3. हम तवज़्ज़ो दें न दें क्या फर्क पड़ता है उसे
    उसकी फितरत है कि वो सुनता है कम, कहता बहुत.

    बढ़िया ग़ज़ल

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  4. आपकी पोस्ट 30/8/2012 के चर्चा मंच पर प्रस्तुत की गई है
    कृपया पधारें

    चर्चा - 987 :चर्चाकार-दिलबाग विर्क

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  5. हम तवज़्ज़ो दें न दें क्या फर्क पड़ता है उसे
    उसकी फितरत है कि वो सुनता है कम, कहता बहुत.

    वाह क्या निशाने पर मारा है :

    कोई सुने ना सुने हम कहते चले जायेंगे
    कहने वाले कब तक मुँह बनायेंगे
    आना जाना होगा यहाँ और वहाँ
    वो नहीं आयेंगे तो हम भी नहीं जायेंगे
    वो अपनी कहें हम भी अपनी कहे जायेंगे !

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  6. वो किसी मजबूत कंधे की सवारी कर रहा है
    वरना उसका इस कदर जमता नहीं सिक्का बहुत.


    Read more: http://www.gazalganga.in/2012/08/blog-post_29.html#ixzz250qBYTXU





    वो किसी मजबूत कंधे की सवारी कर रहा है
    वरना उसका इस कदर जमता नहीं सिक्का बहुत.
    बहुत अच्छी लगी ये ग़ज़ल ये शेर तो कमाल का है दाद कबूल कीजिये









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  7. ज़िन्दगी इकबार भटकी तो भटकती ही गयी
    सबने समझाया बहुत समझा मगर थोडा बहुत.
    वाह ...बहुत खूब।

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  8. हम तवज्जो दें न दें क्या फर्क पड़ता है उसे
    उसकी फितरत है कि वो सुनता है कम, कहता बहुत.

    बहुत खूब !!
    वाह !!

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  9. बहुत ही खूबसूरत ग़ज़ल... सारे शेर अर्थपूर्ण और असरदार

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  10. बोहोत सी सुन्दर रचना ....

    अच्छा लगा आपके ब्लॉग पे आकर

    धन्यवाद

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  11. बढ़िया ग़ज़ल है.सभी शेर लाजवाब.

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कुछ तो कहिये कि लोग कहते हैं
आज ग़ालिब गज़लसरा न हुआ.
---ग़ालिब

अच्छी-बुरी जो भी हो...प्रतिक्रिया अवश्य दें