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रविवार, 9 जनवरी 2022

कत्आ

 

एक कत्आ

फूलों के पहलू में बैठे खंजर थे

चंदन के पेड़ों से लिपटे विषधर थे.

कितने जहरीले थे हमसे मत पूछो

जितना बाहर थे उतना ही अंदर थे.

-देवेंद्र गौतम

1 टिप्पणी:

कुछ तो कहिये कि लोग कहते हैं
आज ग़ालिब गज़लसरा न हुआ.
---ग़ालिब

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