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मंगलवार, 5 जुलाई 2022

हर बीज से दरख्त उगाया न जाएगा.

 


-देवेंद्र गौतम

 

सबका हुनर शुमार में लाया न जाएगा.

हर बीज से दरख्त उगाया न जाएगा.

 

हर शख्स का नसीब बनाया न जाएगा.

ये जाम हर किसी को पिलाया न जाएगा.

 

हर शख्स भले हाथ झटक ले जहान में

लेकिन कभी भी छोड़के साया न जाएगा.

 

कैसे पता चलेगा कि पिसना है सभी को

गेहूं में अगर घुन को मिलाया न जाएगा.

 

महसूस तो होगा कि मना लें चलो मगर

रूठे हुओं को फिर भी मनाया न जाएगा.

 

दरिया की हरेक मौज जिसे ढूंढती फिरे

वो शख्स डूबने से बचाया न जाएगा.

5 टिप्‍पणियां:

  1. "हर बीज से दरख्त उगाया न जाएगा"। बहुत सुंदर। बहुत खूब। सादर।

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  2. हर शख्स भले हाथ झटक ले जहान में

    लेकिन कभी भी छोड़के साया न जाएगा.

    वाह!!!!

    जवाब देंहटाएं
  3. क्या बात है बहुत खूब।
    सुंदर अभिव्यक्ति।
    सादर।

    जवाब देंहटाएं

कुछ तो कहिये कि लोग कहते हैं
आज ग़ालिब गज़लसरा न हुआ.
---ग़ालिब

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